Bharat ne olympic me abtak kitne swarn padak jite hai - CricShot

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Sunday, August 8, 2021

Bharat ne olympic me abtak kitne swarn padak jite hai

Bharat ne Olympics  me abtak kitne swarn padak jite hai

भारत ने ओलंपिक में अब तक कुल 10 स्वर्ण पदक जीते हैं, और अगर बात करे की ओलंपिक में व्यक्तिगत कितने पदक जीते हैं तो भारत ने केवल 2 स्वर्ण पदक जीते हैं

अभिनव बिंद्रा ने जीता भारत के लिए पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण।

Abhinav bindra wins first gold medal
Credit to gettyimagaes

जिसमे पहला स्वर्ण पदक अभिनव बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में जीता था ।

अभिनव बिंद्रा अब तक 150  से भी ज्यादा अपने 22 साल के कैरियर में पदक जीत चुके है ।

अभिनव बिंद्रा द्वारा जीते गए कुल स्वर्ण पदक।

 ओलिंपिक खेलों

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2008 बीजिंग 

विश्व चैंपियनशिप

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2006 ज़ाग्रेब 

राष्ट्रमंडल खेल

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2002 मैनचेस्टर

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2006 मेलबर्न 

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2010 दिल्ली 

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2014 ग्लासगो 

मुख्य है।

अभिनव बिंद्रा को भारत सरकार के द्वारा पद्म भूषण    एवं अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।


दूसरा स्वर्ण

नीरज चोपड़ा ने जीता भारत के लिए ओलंपिक में दूसरा व्यक्तिगत स्वर्ण पदक।

Niraj chopra wins gold at Tokyo olympics


 नीरज चोपड़ा ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक स्पर्धा में जीता ।

जो प्रतियोगिता हाल में ही सम्पन्न हुई है ।

नीरज चोपड़ा द्वारा जीते गए अन्य स्वर्ण पदक

ओलिंपिक खेलों

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2020 टोक्यो भाला फेंक


एशियाई खेल

स्वर्ण पदक - पहला स्थान 

2018 जकार्ता


राष्ट्रमंडल खेल

स्वर्ण पदक - पहला स्थान

 2018 गोल्ड कोस्ट


एशियाई चैंपियनशिप

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2017 भुवनेश्वर


दक्षिण एशियाई खेल

स्वर्ण पदक - प्रथम स्थान 2016 गुवाहाटी/शिलांग


विश्व जूनियर चैंपियनशिप

स्वर्ण पदक - पहला स्थान 2016 ब्यडगोस्ज़कज़ 


मिलाकर अब तक 6 गोल्ड मैडल जीत चुके है।

इनको 2018 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।


भारत ने अब तक कुल 10 स्वर्ण पदक जीते है

भारत ने अब तक कुल 10 स्वर्ण पदक जीते है जिसमे केवल 8 पदक तो भरतीय हॉकी टीम के है।

और अगर व्यक्तिगत स्वर्ण पदक की बात करे तो अभी तके मात्र 2 स्वर्ण पदक ही हासिल कर पाए है।


पहला स्वर्ण पदक 

भारतीय पुरुष हॉकी टीम 1920 के दशक के अंत से 1950 के दशक   अपराजेय रही, जिसने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम के रूप में अपने अधिकार पर मुहर लगाई।


भारतीय पुरुष हॉकी टीम - एम्स्टर्डम 1928

भारत ने 29 गोल किए - 14 अकेले हॉकी के जादूगर ध्यानचंद ने।



दूसरा स्वर्ण पदक 


भारतीय पुरुष हॉकी टीम - लॉस एंजिल्स 1932


भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जापान को 11-1 और यूएसए को 24-1 से हराया।


तीसरा स्वर्ण पदक 


भारतीय पुरुष हॉकी टीम - बर्लिन 1936


ध्यानचंद के नेतृत्व में भारत ने बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक की हैट्रिक पूरी की। टीम ने फाइनल में मेजबान जर्मनी को 8-1 से हराया, जिसमें ध्यानचंद ने स्वर्ण पदक के संघर्ष में चार गोल  किये


चौथा स्वर्ण पदक 


भारतीय पुरुष हॉकी टीम - लंदन 1948


हॉकी टीम ने स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भी अपना दबदबा जारी रखा, लंदन 1948 में स्वतंत्र भारत के रूप में अपनी पहली ओलंपिक उपस्थिति में स्वर्ण पदक जीता। किशन लाल के नेतृत्व में भारत ने पांच मैचों में 25 गोल किए और फाइनल में मेजबान ग्रेट ब्रिटेन को 4-0 से मात दी। वेम्बली स्टेडियम


पांचवा स्वर्ण


 भारतीय पुरुष हॉकी टीम - हेलसिंकी 1952


कप्तान केडी सिंह बाबा और उनके डिप्टी बलबीर सिंह सीनियर ने भारत को हॉकी में लगातार पांचवां स्वर्ण दिलाया, लेकिन फिनलैंड में सर्द मौसम  उबरना पड़ा। टीम ने पहले मैच में विदेशी परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन जब खेल की बात आई तो अपना जलवा दिखा दिया


भारत ने सेमीफाइनल में ग्रेट ब्रिटेन और फाइनल में नीदरलैंड को हराया। बलबीर सिंह सीनियर ने तीन मैचों में नौ गोल किए।


छटवां स्वर्ण


भारतीय पुरुष हॉकी टीम - मेलबर्न 1956

भारत न केवल लगातार छठे स्वर्ण पदक की राह पर था, बल्कि मेलबर्न 1956 में पूरे टूर्नामेंट में क्लीन शीट रखने में भी कामयाब रहा।


भारत ने सेमीफाइनल में जर्मनी (1-0) और पाकिस्तान (1-0) को स्वर्ण पदक से बाहर करने से पहले ग्रुप चरण में सिंगापुर (6-0), अफगानिस्तान (14-0) और यूएसए (16-0) को हराया। 


 सातवाँ स्वर्ण


भारतीय पुरुष  हॉकी टीम - टोक्यो 1964


ओलंपिक में भारतीय हॉकी की जीत की लड़ी 1960 में पाकिस्तान द्वारा तोड़ी गई थी, लेकिन 1964 में वे शीर्ष पर वापस आ गए। ग्रुप स्टेज मैचों के दौरान टीम को जर्मनी और स्पेन से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, दो बार ड्रॉ हुआ और चार बार जीतकर नाकआउट में आगे बढ़ा।

भारत फाइनल में पहुंचा जहां उसने लगातार तीसरी बार पाकिस्तान का सामना किया और पड़ोसियों को 1-0 से हराकर अपना सातवां ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता।


 आठवाँ स्वर्ण


भारतीय पुरुष हॉकी टीम - मास्को 1980


मॉन्ट्रियल में पूर्ववर्ती ओलंपिक में दो कांस्य पदक और निराशाजनक सातवें स्थान पर रहने के बाद, भारत ने 1980 में एक स्वर्ण के साथ वापसी की। एक खाली क्षेत्र में, भारत ने तीन गेम जीते और फाइनल में प्रगति के लिए प्रारंभिक दौर में दो ड्रॉ हुए।

भारत ने मास्को में रोमांचक खिताबी मुकाबले में स्पेन को 4-3 से हराकर आठवां स्वर्ण पदक जीता

नौंवा स्वर्ण पदक

जिसमे पहला स्वर्ण पदक अभिनव बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में जीता था ।

अभिनव बिंद्रा अब तक 150  से भी ज्यादा अपने 22 साल के कैरियर में पदक जीत चुके है ।


दसवाँ स्वर्ण पदक

नीरज चोपड़ा ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक स्पर्धा में जीता ।

जो प्रतियोगिता हाल में ही सम्पन्न हुई है ।


3 comments:

Ankit said...

Major dhyanchand is our pride.

Ankit said...

Major dhyanchand is our pride.

Unknown said...

Good

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